अजब हाल है रे भैया ई लॉकडाउन ससुरा कुछ चीजन में हमार उस्ताद निकला। बहुत कुछ सिखाय दिये हमें। अभी तो तीसरो ही शुरू हुओ है। ना जाने कित्ते और हुइहैं। इसमें तो कई लोग गंगा नाह लिए भाई। चाहे लाखों लोग मर गए हो, करोड़ों इस बीमारी की जकड़ में हो, लेकिन कुछ के लिए तो यह कोराना ऐसा आया कि उनके वारे-न्यारे हो गए। यो ही नजर दौड़ाओं तो कई देशों में एक तरफ लुड़क रही अर्थव्यवस्था में कोराना नाम की बिमारी ने बड़ी संजीवनी का काम किया है। विश्व की कई सरकारों और नेताओं के लिए तो ये ससुरा वरदान बन कर सामने आया, कोरोना और उसका लॉकडाउन। अब आप पूछोगे कैइसे, तो समझिए, पहले से ही मंदी की मार झेल रही देशों की अर्थव्यवस्था में कोराना के बाद लॉकडाउन वहां की निकम्मी सरकारों और नेताओं की सभी करतूतों पर पर्दा डाल गया। अपने ईहां ही देख लो मोटा भाई की सरकार को ही ले लो, जनवरी से एक दम मंद्दी की चपेट में थे, जाने क्या-क्या जतन कर रहे थे, कि अचानक कोरोना नाम की चिड़िया देश की डाल पर आ के बैठ गई। सब राहत ही राहत, अर्थव्यवस्था के गर्त पर जाने का जो बट्टा श्रीमान मोटा भाई की सरकार पर लगना था, वो कोरोना मौसी के भांजे लॉकाडाउन ने अपने उपर ओढ़ लिया। राहुल भैया और प्रियंका बहना तो सिर धूनते ही रह गए। अब वे मोदीकेयर की ऑडिट कराने के पीछे पड़े हुए हैं। ससुरा किस घड़ी मैं पैदा हुआ। कौन सी राशि है भाई । दूसरे मजे आए जमाखोरों के, भाई राशन के व्यापारी छोटे हों या बड़े, दवा दुकानदार छोटे हो या बड़े सब की पौ बारह हो गई। पूरे दो दशक की कमाई एक झटके में, इतना चांदी काटी है। आटा जो 22 रुपये किलो भाई सीधे 35 पे पेला, वहीं हाल अन्य चीजों का भी था। मास्क जो दो रुपये का था 20 में बेचा। तो समझ लो लॉकडाउन आपके लिए तो खराब है, कुछ भाई लोगों के लिए तो पौ बारह करके आया है कि नहीं।
No comments:
Post a Comment