अपना नैनीताल इन दिनों बड़ी चर्चा मैं है भाई, चर्चा तो मई-जून के महीने में इस तलैया वाले शहर की होना कोई नई बात थोड़ेई है। हर साल सीजन में अपने नैनीताल में देशविदेश के जाने कहां-कहां के पर्यटक आते हैं और उनके कारण अपना शहर तो चर्चा में रहता ही है, एक बात और है देश के सभी इंटेलेक्च्वल ही नहीं नौकरशाह और कुर्ताधारी भी यहां बड़े-बडे सेमिनार करने के लिए आते हैं। वे अपनी चिंताओं के साथ थोड़ी सी नैनीताल की भी चिंता करते हैं। बड़े आए नैनीताल की चिंता करने वाले। ऐसे करने वाले हो तो सितंबर और जनवरी के महीने में आके करों ना उस समय हमें आपकी बड़ी जरूरत होती है। क्यों कि मेरे शहर की रोजीरोटी तो नए-नए लोगों के आनेजाने पर ही टिकी ठैरी।
मुद्दे पर लौटते हैं, नैनीताल भर लाॅकडाउन में बड़ी चर्चा में है। वो भी तीसरे लाॅकडाउन के बाद जब उत्तराखंड की सरकार ने मधुशालाएं खोलने का फरमान सुनाया और मधुशालाएं खुलीं। गलब हो लाइन तो तल्लीताल और मालरोड वाली दोनों दुकानों पर लगी थी। इसी बीच जैसा कि मेरे शहर का मौसम कभी भी बदल जाता है, आज भी बिना बताए बदल गया और होने लगा ओलापात यानी ओलावृष्टि वो भी सौ से दो सौ ग्राम के पड.े होगे हो। पूरे 17 से 18 मिनट तक गिरते रहे, लेकिन मजाल है कि शौकीन अपनी जगह से टस से मस हों। सबसे मजे की बात यह थी कि सबके पास छतरियां भी थीं। दूसरी बात इस दौरान पुलिस ने गाना बजाया लोगों को आवाज लगा लगाकर लाइन से हटने के लिए कहा। काई नहीं हटा यहां तक तो सब कुछ ठीक था। लेकिन इसके बाद अपने शहर को बदनाम करने वाले फिर सक्रिय हो गए और कहने लगे कि साहब! देखिए नैनीताल के लोगों को शौकीनों के फोटों ट्यूटर से इंस्टाग्राम समेत तमाम तरह की मीडिया साइटों पर तैरने लगी। कहीं से आवाज आ रही थी कि ये साहब लोगों ने मजूर लगाएथे, आदि इत्यादि, लेकिन साहब मैं बतादूं यदि इस देश के गरीब ने लाॅकडाउन के इतने दिनों में शराब पीना छोड़ दिया था तो सरकारों की अर्थव्यवस्था गड़बड़ा गई थी साहेब!!!!!
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