Tuesday, 25 July 2023

​​ठलुआ जी के अहंकार के किस्से

सपने जब रंगीन होते हैं तो उनका पूरा होना एक तरह से व्यक्ति के भीतर आत्मविश्वास पैदा कर देता है, लेकिन कभी-कभी आत्मविश्वास अहंकार के रूप में व्यक्ति के भीतर पनपने लगता है, यही अहंकार उसके नाश का कारण बनता है।  यही हाल हमारे ठलुआ जी का भी है।  इसी तरह संसार में होने वाले विविध क्रियाकलापों को खुद से जोड़कर ब्रह्मा बने हुए हैं ।
    ठलुआ जी की कथा अजब गजब है, जब मेरी उनसे पहली बार मुलाकात हुई। तब मैं नौकरी ढूंढ रहा था, ठलुआ जी ने इसी दौरान मुझे तमाम तरह के आश्वासन दिए और न जाने किस किस शहर में किस-किस अपने कथित दोस्त के पास नहीं भेजा अब आपको गिनाने लगूंगा तो कई दिन बीत जाएंगे। इसी तरह ठलुआ जी लोगों को मूर्ख बनाते रहे और अपना अहंकार पुष्ट करते रहे।एक बार की बात है, तमाम जतन के बाद मेरी नौकरी एक जूता बनाने वाली फैक्ट्री मैं लग गई, आपको क्या बताऊं, जैसे ही ठलुआ जी को इस बात की खबर हुई, उन्होंने अपना बेसुरा ढोल पीटना शुरू कर दिया, और बताने लगे अपने झूठे सच्चे किस्से कहानी। उनको क्या पता जूता बनाने वाली कंपनी मैं किस काम में लगा हूं, लेकिन उन्होंने सभी जानने वाले और रिश्तेदारों में अपनी शेखी बघारने  के लिए मुझे फैक्ट्री का मैनेजर बता दिया। जब लोग बाग जानने वाले नाते रिश्तेदारों की अपेक्षाएं मुझसे बढ़ गई। लोग मेरे आगे पीछे घूमने लगे, इसी बीच एक दो लोग जब कारखाने में पहुंचे तो वहां उन्हें पता लगा की मेरे नाम का व्यक्ति वहां चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी है, इस बात को फैलने में मेरे मैनेजर होने की खबर से भी कम समय लगा। मात्र 4 घंटे में ही सारे नाते रिश्तेदारों में, मैं पानी पिलाने वाला चपरासी बन गया। यह खबर ठलुआ जी को भी लगी, उन्होंने इससे अपने अंदाज में कहा, ससुरा इनकी औकात ही है, पानी पिलाने की वह तो हम ऐसे ही मैनेजर बता दिए थे।  ऐसे हैं अपने ठलुआ जी जो कहो जो ना कहो, जो करो, जो ना करो ठलुवा जी कुछ भी कर सकते हैं।लेकिन हकीकत इसके बिल्कुल उलट थी ना हम  मैनेजर थे नाही चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी वहां केवल अप्रेंटिस में काम सीख रहे थे, सही बताएं ठलुआ जी हकीकत से अभी भी कोसों दूर हैं।

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