Wednesday, 30 June 2010

अबे शादियों की बेकदरी वेस्ट में ही क्यंू

एक तरफ अतंरनाद है, एक तरफ शहनाई
दुल्हे बेटा, सभल जा, तेरी सामने मुश्किल आई
बारात कब लौट जाए कौन जाने इस इलाके में, ये इलाका बड़ा बदनाम है यारो, रामायण काल का मयराष्ट्र लंका के राजा रावण की ससुराल, महाभारत काल का हस्तिनापुर चक्रवृति राज्य की राजधानी क्षेत्र, वर्तमान में राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली का एनसीआर, वैसे इसे कहते हैं वेस्टयूपी, पश्चिमी उत्तर प्रदेश तो कहते ही है, मां नौ चंदी, बालसुंदरी और शाकुम्भरी के उपासकों का इलका और अन्नपूर्णा की कृपा क्षेत्र, यह गंगा-यमुना नदियों के दोआब क्षेत्र। कुछ वर्षों में जल्द ही बन जाएगा देश का एक अलग राज्य नाम होगा हरित प्रदेश।
इस इलाके में बिरादरियां बड़ी मायने रखती हैं, भूखा मर रहा हो बिरादर रोटी चाहे उसे ना दे, ये बात अलग है, लेकिन उसके बेटे या बेटी के रिश्ते के मामले में कोई ऊंच-नीच हो गई तो वहीं भाई जो उसके भूखे रहते एक सूखी रोटी भी देने को तैयार नहीं था, एक दम सगा हो जाएगा। एेसा सगा कि अपनी जान देने, जेल जाने और आर-पार की लड़ाई लडऩे को तैयार, यहां तक कि सड़क से संसद तक ताल ठोक दे। आज-कल पंचायतों के फैसलों और ऑनरकिलिंग के मामलों के लिए राष्ट्रीय, अंतराष्ट्रीय मिडिया में भी छाया हुआ है अपना वेस्टयूपी। यहां के अच्छे-बुरे कई पहलू हैं। बुरे पहलुओं को उजागर करने के लिए आजकल हर कोई तैयार रहता है। गोया यहां की हत्या, बलात्कार, छेड़छाड़ और ना जाने लूट डकैतियां और कौन-कौन सी घटनाएं हैं जो कि सुरखियां बन जाती है। अच्छी बातें जो यहां हैं, यहां के लोग सरल भी हैं और बड़े भोले भी कि कुछ चालाक लोग इनके भोले पन का लाभ उठाकर उन्हें धकेल देते हैं अपराध की दुनियां में, यहां के निवासियों की एक बड़ी खासियत और है जिसको हमेशा लोग नजर अंजाद कर देते हैं, वो है बाहरी व्यक्ति को एक दम स्वयं से घुलामिला लेने की प्रवृत्ति, जिसे हमेशा नजर अंदाज किया जाता है। हां यहां की कमियों के पीछे मीडिया से लेकर तमाम सूचना के तंत्र भी लगे रहते हैं। यहां बाराते जब तक सकुशल लौटकर घर ना आए तबतक शादी हुई ना समझो की कहावत भी प्रचलित है। शादियों को बंधक बनाना, बारातियों की पिटाई, दुल्हनों की हत्या समेत तमाम दाग हैं, पूरे देश में यह सबकुछ होता है, लेकिन यहां हो जाए तो हायतौबा। कहते हैं ना यहां के किसानों के हरेभरे खेत देख कर जलते हैं शेष देस के लोग, यहां के लोगों का बैभव देख कर छातियों पर सांप लोटने लगते हैं, इसी लिए तो यहां का स्याह पक्ष ही हमेशा अखबारों और चैनलों की सुर्खियां बनता है। पूरे यूपी के सबसे अधिक आईएएस, शिक्षक और इंजीनियर,नेट परीक्षा पास करने वाले, राष्ट्रीय अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी देने वाले इस वेस्ट यूपी को लोग इस लिए याद नहीं करते कि यहां विभूतियां भी हैं, यहीं से दुष्यंत कुमार जैसे गजल और गीत कर निकले हैं, यहां से एक प्रधानमंत्री भी लोगों को दिया। इसके लिए वेस्ट को याद नहीं किया जाता, यही से आजादी का पहला संग्राम मेरठ में ही फूंका था। इसी भेदभाव का ही तो नतीजा है कि यहां के प्रमुख क्रांति स्थलों को राष्ट्रीय क्रांति स्थलों की सूची में तक स्थान नहीं दिया गया, गजब हाल है यार। थोड़ी सी छेड़छाड़ हो गई, छोरियों का थोड़ा परदे पे रख दिया, उनके प्यार-ब्यार पे रोक लगा दी, तो... जनम जले लगे वेस्ट की बुराई करने। एक मामला अभी सामने आया, एक अखबार में खबर पढ़ी कि दुल्हन की एजुकेशन के आगे दूल्हे ने हार मानी। बारात बैरंग लौटी, तो मेरा दोस्त ठलुवा कहानी सुनने को उतावला हो गया। में कथा बांचता रहा और मित्र ठलुवा कथा को नए-नए आयाम देता रहा।
ठलुवा उवाच...गाजियाबाद जिले के मोदीनगर कस्बे के पास निवाड़ी के गांव मऊ से एक बारात बिना दूल्हे के लौट गई। क्यों भई...ठलुवा बोला, बारात क्यों कर लौटाई... लौटाई क्यों ना जाती बारात को आठ घंटे बंधक भी तो रहना पड़ा था, पहले बारात गाजियाबाद के ही पिलखुवा इलाके के गांव अनवरपुर से आनी थी, लेकिन अचानक दूल्हा घर से गायब हो गया। आनन-फानन में दूल्हे के फुफेरे भाई को शादी के लिए रजामंद किया गया, उसे घोड़ी पर बैठा कर मऊ गांव तक लाया भी गया। ... अरे फिर क्या हुआ, होना क्या था दूल्हे के बदलने की खबर बिरादरी वालों को लग गई। फिर क्या था तुम तो जानते ही बिरादरी वालों का गुस्सा, बिरादरी का कानून, बिरादरी की खाप पंचायतें, आरे भाई वही सरपंजों का परपंच यार... जिसका खौफ इतना है कि वो बसे-बसाए घर का कबाड़ा कर दे... अजी संगोत्रीय विवाह कर लिया खत्म करो रिश्ता, ... कैसे करे यार, करो.. करो.. नहीं करते, ... अबे जिसे इतने बरस पत्नी बनाकर साथ रखा, उसके साथ जिंदगी के फलसफे गाए, ना जाने वो क्या.. क्या किया, अब.... उसके हाथ से राखी बंधवाओं। अबे ठलुवे क्यों बात को भटका देता है, मूल मुद्दे पर आ ना बारात क्यों लौटी। सुन.. बे... बिरादरी में जब दूल्हे के कम पढ़े लिखे होने की बात सामने आई तो पहले रजामंद हुए छोरी वालों ने बिरादरी के दबाव में दूसरे दूल्हे से शादी करना नामंजूर कर दिया। या नू कहें कि लड़की वाल्ले मुकर गए, हौर क्या, इस मामले में दुल्हन की एजुकेशन आडे़ आ गई। छोरी बीए पास थी और छोरा ससुर का नाती हाइस्कूल में भी तीसरे मुकाबले में पास हुआ था, वो भी नीचे से पहली डिवीजन के साथ।
अबे ये वेस्ट यूपी है बे................. जरा संभल के बोल.. यहां जो ना हो वो कम बोले तो....चुप!!!!!!....।

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